अपने बच्चों को लिंग भेद न करते हुए उन्के गुप्त अंगो
1 छाती (वक्ष स्थल)
2 जांघो के मध्य भाग
3 नितम्ब
के विषय में ज्ञान जरूर दें। उन्हें बताएं कि इन अंगों को कोई स्पर्श नहीं कर सकता। केवल डाक्टर भी माता पिता की उपस्थिति में ही इनकी जांच के लिए स्पर्श कर सकता है। माता पिता भी तभी स्पर्श कर सकते हैं जब वे उन्हें नहला रहे हों अथवा कोई रोग या ऐसा कोई जरूरी कारण हो।
यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करता है या ऐसा करने के लिए कहता है तो बच्चों को ये तीन कदम उठाने के लिए कहें
1. जोर से चिल्लाएं
2. किसी सुरक्षित स्थान तक अपनी पहूंच बनाएं
3. तुरंत अपने माता पिता या अभिभावक को बताएं
इसके अलावा बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखें देखें कि बच्चा किसी प्रकार से असहज या असामान्य व्यवहार तो नहीं कर रहा वो डरा हुआ तो नहीं या किसी की उपस्थिति में बेचैन, डरा हुआ, असहज तो नहीं। वो किसी स्थान विशेष में जाने से डर रहा हो, घबराहट दिखाए या गैरजरूरी झिझक दिखाए। ऐसी स्थिति में बच्चे को बुलाकर प्रेम से उसका विश्वास जीतें और समस्या जानने की कोशिश करें।
यदि बच्चा कुछ बताता है तो उसे ध्यान से सुने और कोई प्रतिक्रिया न दें ( क्योंकि अक्सर बच्चों के साथ गलत करने वाले बहुत नजदीकी लोग होते हैं जिनके विषय में ऐसा विश्वास या सोचना मुश्किल होता है)
सही स्थिति की जानकारी कर तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। हमेशा याद रखें आपके बच्चे का आप पर भरोसा बहुत जरूरी है। उन्हें बताएं कि अगर कोई ऐसी किसी बात या हरकत को किसी को न बताने के लिए कहता है तो उस बात को माता पिता से जरूर सांझा करें। अपने बच्चों को इतना वक्त और स्थान जरूर दे कि वो आपमें भरोसा कर सकें तथा अपनी परेशानी एवं समस्या आप को बता सकें।
अपने बच्चों के दोस्त बने और उनके स्वस्थ विकास के लिए सुरक्षित और सही वातावरण प्रदान करें।
माता पिता होने और उस भूमिका को भली प्रकार निभाने की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
यदि आप ऐसा करते हैं तो बच्चों के साथ होने वाले दुश्कर्म को रोक पायेंगे ।
1 छाती (वक्ष स्थल)
2 जांघो के मध्य भाग
3 नितम्ब
के विषय में ज्ञान जरूर दें। उन्हें बताएं कि इन अंगों को कोई स्पर्श नहीं कर सकता। केवल डाक्टर भी माता पिता की उपस्थिति में ही इनकी जांच के लिए स्पर्श कर सकता है। माता पिता भी तभी स्पर्श कर सकते हैं जब वे उन्हें नहला रहे हों अथवा कोई रोग या ऐसा कोई जरूरी कारण हो।
यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करता है या ऐसा करने के लिए कहता है तो बच्चों को ये तीन कदम उठाने के लिए कहें
1. जोर से चिल्लाएं
2. किसी सुरक्षित स्थान तक अपनी पहूंच बनाएं
3. तुरंत अपने माता पिता या अभिभावक को बताएं
इसके अलावा बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखें देखें कि बच्चा किसी प्रकार से असहज या असामान्य व्यवहार तो नहीं कर रहा वो डरा हुआ तो नहीं या किसी की उपस्थिति में बेचैन, डरा हुआ, असहज तो नहीं। वो किसी स्थान विशेष में जाने से डर रहा हो, घबराहट दिखाए या गैरजरूरी झिझक दिखाए। ऐसी स्थिति में बच्चे को बुलाकर प्रेम से उसका विश्वास जीतें और समस्या जानने की कोशिश करें।
यदि बच्चा कुछ बताता है तो उसे ध्यान से सुने और कोई प्रतिक्रिया न दें ( क्योंकि अक्सर बच्चों के साथ गलत करने वाले बहुत नजदीकी लोग होते हैं जिनके विषय में ऐसा विश्वास या सोचना मुश्किल होता है)
सही स्थिति की जानकारी कर तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। हमेशा याद रखें आपके बच्चे का आप पर भरोसा बहुत जरूरी है। उन्हें बताएं कि अगर कोई ऐसी किसी बात या हरकत को किसी को न बताने के लिए कहता है तो उस बात को माता पिता से जरूर सांझा करें। अपने बच्चों को इतना वक्त और स्थान जरूर दे कि वो आपमें भरोसा कर सकें तथा अपनी परेशानी एवं समस्या आप को बता सकें।
अपने बच्चों के दोस्त बने और उनके स्वस्थ विकास के लिए सुरक्षित और सही वातावरण प्रदान करें।
माता पिता होने और उस भूमिका को भली प्रकार निभाने की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
यदि आप ऐसा करते हैं तो बच्चों के साथ होने वाले दुश्कर्म को रोक पायेंगे ।